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What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?

Topic created · 105 Posts · 5604 Views
  • @doodlebean Thank you ma'am. Its means a lot for me. Your quest profile signature is Zabardast (Powerful and inspiring at a time)👌

  • @LazyNeutron said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    @doodlebean Thank you ma'am. Its means a lot for me. Your quest profile signature is Zabardast (Powerful and inspiring at a time)👌

    Thank you.... 😊

  • @IWRA @doodlebean @Yo_Yo_Choti_Singh
    sir I want to read arc report for GS paper..

    Original reports are voluminous....
    Should I read original or summary ....
    If summary then of which teacher / institute.

    TIA

  • @IWRA admin will kill you😁 😂 (Posting rules) but extremely helpful for me. Will follow this. Thanks Sir. PRANAM🙏

  • @safari said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    @IWRA @doodlebean @Yo_Yo_Choti_Singh
    sir I want to read arc report for GS paper..

    Original reports are voluminous....
    Should I read original or summary ....
    If summary then of which teacher / institute.

    TIA

    Original nahi padhna hai. Summary bhi selective reports ki. @IWRA Can guide you better regarding institute or teacher.

  • @doodlebean ok madam

  • @safari

    Detailed study of all chapters is not required. Though you can read 4th report (Ethics).

    Rest, see any chapter from the PDFs in this telegram group and glance through it, make important points.

    [link remove]

    @arcreport

  • @root its a copy paste from quora, but very very true!

    Opening a PDF has never been scarier.

    This time the results were a little delayed than usual and hence the pressure had subsided a little in my case over time. I was on telegram the whole day on 5th April, to the extent that my eyes had started to burn.

    It was then that my maa asked me to keep away the phone and probably read something or listen to music. I had started preparing for prelims, hence I started reading a CA booklet until evening.

    After 5pm, I couldn't just focus on anything else and I started moving in and out of my room, talking to my flatmate, talking on phone back home.

    When the PDF finally came, my heart had relocated to my mouth. Even though I knew I'd definitely crack top 200, a Rank of 35 was unexpected. I saw my name in a PDF posted on telegram and my parents didn't believe cuz they thought it wasn't authentic. The website wasn't showing it yet.

    People started calling incessantly and it is then that I finally realised that I had actually scored Rank 35. I couldn't stop shaking for a few minutes.

    After that I rushed to ForumIAS where truckloads of congratulations came my way. Initially you feel like everything is getting numb, people are congratulating but why?, Should I be excited?, Is it really happening?

    In my opinion I have still not fully digested this fact. It's not sunk in yet, because it's HUGE. People who haven't talked to me for a 1000 years are now calling and congratulating me. Rishtedars, who don't care if you existed before, are now calling up.

    So the feeling is definitely exhilarating but yet to actually sink in and fortify itself. It's partly for this that you dream, don't you?

  • स्कूल का एनुअल डे फंक्शन था . एक पूरी रात उसने जाग कर काट दी थी . हो भी क्यों ना , आँखों में इतने सपने जो थे . आखिर लगातार सातवे वर्ष उसने पूरे विद्यालय में टॉप किया था . लगता था ये रात कब ख़तम होगी और सुबह वह किसी VIP से कम ना होगी . पिताजी का सीना गर्व से चौड़ा होगा और माँ फूली ना समायेंगी जब तीसरे मैडल के लिए उसका नाम पुकारा जाएगा . हर ओर तालियों की गडग़ड़ाहट होगी और वो किसी राजकुमारी की तरह स्टेज पर जाएगी .उतरते ही बधाई देने वालो का तांता लग जाएगा . आखिर वो अपनी टीचर्स की भी तो लाड़ली थी .

    पता चला जिलाधिकारी महोदय आ रही है पुरस्कार वितरण के लिए तो ख़ुशी दुगुनी हो गयी . अधीरता से उनके आगमन का इंतज़ार चल रहा था . परन्तु यह क्या मेरी सारी रौशनी तो यह ले गयी . मैडम का आगमन क्या हुआ हर तरफ उथल पुथल मच गयी . वो सोचती रही की यह कैसी महिला है जो आगे चल रही है और पीछे वर्दी वाले मर्द . ऐसी महिलाये भी होती है क्या ! चाहे वह उसके उस ख़ास दिन की लाइमलाइट ले गयी हो परन्तु उसको वो किसी परी से कम ना मालुम पड़ रही थी . पिताजी जी ने लाड़ली से पूछा की इनाम में क्या चाहिए तो बचपने में बस यही मुँह से निकला - " पापा ! मैडम जैसा कैसे बनते है ? "

    ....'जय हिन्द मैडम' की आवाज़ से तंद्रा टूटी तो वो इतिहास के पन्नो से निकली और देखा सिपाही सलूट जड़े गाढ़ी का दरवाज़ा खोले खड़ा है . वह हौले से मुस्कुरायी और काम पर निकल पड़ी .

  • @doodlebean said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    स्कूल का एनुअल डे फंक्शन था . एक पूरी रात उसने जाग कर काट दी थी . हो भी क्यों ना , आँखों में इतने सपने जो थे . आखिर लगातार सातवे वर्ष उसने पूरे विद्यालय में टॉप किया था . लगता था ये रात कब ख़तम होगी और सुबह वह किसी VIP से कम ना होगी . पिताजी का सीना गर्व से चौड़ा होगा और माँ फूली ना समायेंगी जब तीसरे मैडल के लिए उसका नाम पुकारा जाएगा . हर ओर तालियों की गडग़ड़ाहट होगी और वो किसी राजकुमारी की तरह स्टेज पर जाएगी .उतरते ही बधाई देने वालो का तांता लग जाएगा . आखिर वो अपनी टीचर्स की भी तो लाड़ली थी .

    पता चला जिलाधिकारी महोदय आ रही है पुरस्कार वितरण के लिए तो ख़ुशी दुगुनी हो गयी . अधीरता से उनके आगमन का इंतज़ार चल रहा था . परन्तु यह क्या मेरी सारी रौशनी तो यह ले गयी . मैडम का आगमन क्या हुआ हर तरफ उथल पुथल मच गयी . वो सोचती रही की यह कैसी महिला है जो आगे चल रही है और पीछे वर्दी वाले मर्द . ऐसी महिलाये भी होती है क्या ! चाहे वह उसके उस ख़ास दिन की लाइमलाइट ले गयी हो परन्तु उसको वो किसी परी से कम ना मालुम पड़ रही थी . पिताजी जी ने लाड़ली से पूछा की इनाम में क्या चाहिए तो बचपने में बस यही मुँह से निकला - " पापा ! मैडम जैसा कैसे बनते है ? "

    ....'जय हिन्द मैडम' की आवाज़ से तंद्रा टूटी तो वो इतिहास के पन्नो से निकली और देखा सिपाही सलूट जड़े गाढ़ी का दरवाज़ा खोले खड़ा है . वह हौले से मुस्कुरायी और काम पर निकल पड़ी .

    I know this clearly defies the domain of this group. Sorry for that. But some excerpt from my Diary. If motivation is the objective then why to restrict to D-day only.... 😊

  • दफ़्तर की कुर्सी
    ——————

    यूँ तो दो साल हो जाएँगे पर वो पहला दिन आज भी याद हैं .
    इस कुर्सी पर जमे तो उम्मीद थी बहुत लोग मिलने आएँगे .

    हवलदार ने आकर पर्ची थमायी - नाम लिखा था ‘अदब’. अंदर बुलाने का इशारा पाते ही उन्हें बुलाया गया . एक बुज़ुर्ग आए और झुककर बोले - ‘मैडम ! Good Morning’. संदेह एवं आदरमिश्रित स्वर में मैंने कहाँ - ‘बाऊजी उम्र में मुझसे इतने बढ़े है तो मैडम ना बोले’ ...वह बोले - ‘बेटा सलाम तेरी कुर्सी को हैं . जिस दिन तू इसकी इज़्ज़त ना करेगी मैं तुझसे कभी मिलने ना आऊँगा’

    दूसरे आगंतुक रहे - ‘अभिमान’ . इनकी तो और कमाल रही. आते ही मेरे पाओं में पसर गये . बहुत कोशिश की उठाने की तो बोले - ‘बिटिया ! मुझे हमेशा अपने पाओं में रखना . जिस दिन तूने सर पर बिठाया उस दिन तुझे दुनिया नज़रों से गिरा देगी ‘

    अभी इन महानुभावों की बातें समझ ही पा रही थी की ‘ईमानदारी’ ने दरवाज़ा खटखटाया . बोली - ‘मैडम आपका पहला दिन हैं तो उपहार लायी थी’ . यह क्या- पिताजी ने समझाया था तनख़्वाह के अलावा कुछ ना लेना किसीसे .इस घूसकाल में मेरा संदेह लाज़मी था . मैंने उपहार लेने से मना किया तो उसने विनम्रभाव से कहाँ - ‘बेटी देख तो ले फिर चाहे वापसी कर देना’ ... त्योरियाँ चढ़ा रैपर हटाया . खोला तो उसमें ‘साहस’ पड़ा था . बोली ये तेरे पास छोड़ जाती हूँ . जब मुझसे मन भर जाए तो इसे खिड़की से बाहर फेंक देना . इसका फिर कोई काम ना रहेगा...........

    चाय के लिए घंटी बजायी तो उठ खड़े हुए . बोले एक मेहमान रह गयी हैं . जिस दिन वो आएगी सब साथ में पिएँगे . नमस्कार के साथ सबको विदा किया . उत्सुकतावश चौथे मेहमान का नाम पूछा तो तीनो एक साथ बोल उठे -‘सफलता’ !!

    आज भी तीनो आते रहते हैं ......

    ——-.—————.————-

    चाय आज भी उधार हैं ....... 😊

  • @doodlebean afsos hai ki hindi ki mahatta kam kya khatam si ho gayi hai. Warna aisi lady Premchand ko padh kar bada accha lagta hai.

  • है था पुकारा छल को फिर
    जब लुट रहा संसार था
    ना थम सकी वो रात फिर
    ना थम सका वो कारवां

    थे सब्र और संयम जुदा
    और मिट रहे इंसान थे
    क्या हश्र था इंसानियत का
    जब रो रहे शैतान थे

    थे मृत भी और कायर भी थे
    जो वीरता से थे अपरिचित
    शौर्य की तो क्या कहो
    वो पुरुषत्व के गुण से थे वंचित

    पर थे कहाँ वो,आँचल में क्या
    आँचल में जीना क्या पाप था
    देखा धरा ने एक आह से
    अविनाशियों का अकाल था

    पर थे अभी आँचल में भी
    कुछ अंकुरित,नव पल्लवित
    शौर्यता थी,वीरता थी
    और शक्ति थी कुछ उल्लवित

    फिर धरा ने देखा पलटकर
    है कौन जो फिर उठ पड़ा
    वो तो वही था,एक आदमी था
    था फख्र से जो,फिर उठ खड़ा

  • @Progeny शानदार जबरदस्त जिंदाबाद

  • @Progeny
    Speechless I am 😊👏🏻

  • @Progeny said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    @doodlebean afsos hai ki hindi ki mahatta kam kya khatam si ho gayi hai. Warna aisi lady Premchand ko padh kar bada accha lagta hai.

    आभार 🙏

  • @doodlebean adbhut... hindi jo josh jagati hai uski baat hi alag hai.. maaf kijiyega abhi angrezi shabdo me hi type kar rahi hu.. par aapne bahut hi badhiya likha hai.. Diary likhna zari rakhiyega.. ye kitab me tabdil ho sakti hai, kya pata bhavishya me hume aapki kitaab padhne ko mile... bahut hi rochak tha.. ! 🙂 🙂

  • @doodlebean said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    स्कूल का एनुअल डे फंक्शन था . एक पूरी रात उसने जाग कर काट दी थी . हो भी क्यों ना , आँखों में इतने सपने जो थे . आखिर लगातार सातवे वर्ष उसने पूरे विद्यालय में टॉप किया था . लगता था ये रात कब ख़तम होगी और सुबह वह किसी VIP से कम ना होगी . पिताजी का सीना गर्व से चौड़ा होगा और माँ फूली ना समायेंगी जब तीसरे मैडल के लिए उसका नाम पुकारा जाएगा . हर ओर तालियों की गडग़ड़ाहट होगी और वो किसी राजकुमारी की तरह स्टेज पर जाएगी .उतरते ही बधाई देने वालो का तांता लग जाएगा . आखिर वो अपनी टीचर्स की भी तो लाड़ली थी .

    पता चला जिलाधिकारी महोदय आ रही है पुरस्कार वितरण के लिए तो ख़ुशी दुगुनी हो गयी . अधीरता से उनके आगमन का इंतज़ार चल रहा था . परन्तु यह क्या मेरी सारी रौशनी तो यह ले गयी . मैडम का आगमन क्या हुआ हर तरफ उथल पुथल मच गयी . वो सोचती रही की यह कैसी महिला है जो आगे चल रही है और पीछे वर्दी वाले मर्द . ऐसी महिलाये भी होती है क्या ! चाहे वह उसके उस ख़ास दिन की लाइमलाइट ले गयी हो परन्तु उसको वो किसी परी से कम ना मालुम पड़ रही थी . पिताजी जी ने लाड़ली से पूछा की इनाम में क्या चाहिए तो बचपने में बस यही मुँह से निकला - " पापा ! मैडम जैसा कैसे बनते है ? "

    ....'जय हिन्द मैडम' की आवाज़ से तंद्रा टूटी तो वो इतिहास के पन्नो से निकली और देखा सिपाही सलूट जड़े गाढ़ी का दरवाज़ा खोले खड़ा है . वह हौले से मुस्कुरायी और काम पर निकल पड़ी .

    Ma'am, I am a fan of your writing

    You should write a novel...wo bhi Hindi me.. 😊

  • @doodlebean said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    @Progeny said in What is the first feeling you have when you see your name in the holy PDF of UPSC?:

    @doodlebean afsos hai ki hindi ki mahatta kam kya khatam si ho gayi hai. Warna aisi lady Premchand ko padh kar bada accha lagta hai.

    आभार 🙏

    So, she has got two names now..

    Lady Follet ( pub ad junta)
    And Lady Premchand 😁

  • @doodlebean @Progeny . Speechless . Plz keep writing , sharing and motivating us.

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